प्रात: ब्रह्ममुहूर्त में जागने से लेकर रात्रि सोने तक विद्यार्थी श्रृंखलाबद्ध तरीके से विद्याध्ययन करने, भोजन करने तथा खेल-कूद आदि समस्त क्रिया-कलापों में व्यस्त रहता है। इससे कि बचपन से ही अनुशासन में रहकर बालक की शिक्षा इतनी मजबूत हो जाती है कि वह चरित्रवान् होकर अपना समस्त जीवन बिना किसी कठिनाई के व्यतीत करने में तत्पर रहता है। छात्रायें प्रतिदिन यज्ञ करती हैं।यह नियमितता बच्चों में अनुशासन का भाव पैदा करती है, विनम्र और समूह का हिस्सा बनाना सिखाती है| बच्चों में स्वावलम्बन की भावना का विकास करने के लिए गुरुकुल का यह विशेष नियम है कि बच्चे अपने निजी कार्य जैसे- वस्त्रप्रक्षालन, पात्रशोधन एवं परिसर शोधन का कार्य स्वयं करें।
गुरुकुल में प्रविष्ट छात्राओं की दिनचर्या और दैनिक कार्यक्रम समयबद्धरूप में निम्न सारिणी में दर्शाया गया है|
| समय अंतराल | दैनिक कार्य |
| ४:०० – ४:१५ | प्रातःजागरण, ईशप्रार्थना-मंत्रपाठ |
| ४:१५ – ४:४५ | उषापान, शौचादि, दंतधावन, आश्रम शोधन-प्रक्षालन |
| ४:४५ – ५:४५ | दौड़, व्यायाम, योग, आसन, प्राणायाम |
| ५:४५ – ६:१५ | स्नान, वस्त्रप्रक्षालन |
| ६:१५ – ७:०० | संध्योपासना-अग्निहोत्र (प्रात:) |
| ७:०० – ७:३० | वेद-स्वाध्याय, वेद-प्रवचन |
| ७:३० – ८:०० | प्रात:राश (नाश्ता) |
| ८:०० – ८:३० | विद्यालय सामूहिक प्रार्थना |
| ८:३० – १२:०० | विद्यालय वेद-वेदांग पठन-पाठन |
| १२:०० – १२:३० | भोजन (मध्याह्न) |
| १२:३० – २:०० | मध्याह्न विश्राम (निद्रा रहित), पाठस्मरण |
| २:०० – ४:३० | विद्यालय पठन-पाठन |
| ४:३० – ६:०० | क्रीड़ा खेल-कूद, श्रमदान, वस्त्रप्रक्षालन, गौसेवा |
| ६:०० – ६:३० | संध्या-हवन (सायं) |
| ६:३० – ७:०० | भोजन हल्का (रात्रि), स्थालिकाप्रक्षालन |
| ७:०० – ७:३० | भ्रमण, गोदुग्धपान |
| ७:३० – ९:०० | स्वाध्याय, पाठस्मरण, आत्म-निरीक्षण |
| ९:०० – ४:०० | रात्रि ईशप्रार्थना, रात्रि-शयन (गहन निद्रा) |
टिप्पणी:
- मौसम के अनुसार तथा विद्यालय में उपरोक्त दिनचर्या में परिवर्तन किया जाता है।
- विद्यालय से अवकाश के दिन विद्यालय पठन-पाठन केअतिरिक्त शेष दैनिक कार्य यथावत् रहेंगे|
